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कबीर की मोटरसाइकिल रिस्टोरेशन कहानी

Eager Butterfly 892@eager-butterfly-892

कबीर की मोटरसाइकिल रिस्टोरेशन कहानी

22 साल का कबीर, एक टूटी-फूटी साइकिल को देखकर रो पड़ा। "दादाजी की ये आखिरी निशानी कबाड़ में नहीं सड़ेगी, इसे मैं फिर से ज़िंदा करूँगा!" कबाड़ी ने हँसते हुए कहा, "अरे भाई, ये लोहा गल चुका है, इसका इंजन कभी स्टार्ट नहीं होगा।" लेकिन कबीर ने हार नहीं मानी। रात-दिन एक कर दिया। तीन महीने की मेहनत के बाद... पहली बार इंजन धुआँ छोड़कर दहाड़ा! वही कबाड़ी शर्म से सिर झुकाए खड़ा था। सबकी नज़रें बदल गई थीं।

प्रेरणा#kahaniहिन्दी

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    22 साल का कबीर, एक टूटी-फूटी साइकिल को देखकर रो पड़ा। "दादाजी की ये आखिरी निशानी कबाड़ में नहीं सड़ेगी, इसे मैं फिर से ज़िंदा करूँगा!" कबाड़ी ने हँसते हुए कहा, "अरे भाई, ये लोहा गल चुका है, इसका इंजन कभी स्टार्ट नहीं होगा।" लेकिन कबीर ने हार नहीं मानी। रात-दिन एक कर दिया। तीन महीने की मेहनत के बाद... पहली बार इंजन धुआँ छोड़कर दहाड़ा! वही कबाड़ी शर्म से सिर झुकाए खड़ा था। सबकी नज़रें बदल गई थीं।